किसी गांव में 'बुद्धिमती' नामक स्त्री रहती थी।  एक बार वह अपने दो पुत्रों  के साथ अपने पिता के घर की ओर चल पड़ी।  

रास्ते में उसे उसकी ओर आता हुआ एक बाघ दिखाई पड़ा।  बुद्धिमता का परिचय देते हुए एक अभिनय किया।
उसने अपने बच्चों को धमकाते हुए कहा - 'तुम एक-एक बाघ खाने के लिए झगड़ा क्यों कर रहे हो?  आज एक बाघ से ही काम चला लो।'  यह सुनकर कर भाग गया।


उस भागते हुए बाघ को एक गीदड़ कहने लगा - 'तुम बड़े मूर्ख हो।  तुम एक मनुष्य से डर कर भाग रहे हो।  मैं तुम्हारे साथ चलता हूं।'  उस पर विश्वास करके वह बाघ गीदड़ को साथ लेकर उस स्त्री  की ओर चल पड़ा । 
अपनी ओर आते हुए बाघ को देख उस स्त्री ने अभिनय के साथ गीदड़ को पट फटकरते हुए कहा - 'तुमने तीन बाघ कराने का वादा किया था।  आज एक क्यों लाए हो ?'  यह सुनकर  वह बाघ वहां से भाग गया।

इस प्रकार उस स्त्री ने अपनी और अपने पुत्र की  जानकी रक्षा की ।

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